प्रेमानन्द स्वामी जी ने मात्र 13 वर्ष की आयु में गृह त्याग दिया।

 प्रेमानन्द स्वामी जी ने मात्र 13 वर्ष की आयु में गृह त्याग दिया।


हर मौसम में तीनों पहर गंगा स्नान करना, गिनती के घरों में भिक्षा मांगकर पेट भरना, न मिलने पर भूखे पेट रहना। दोनों किडनी खराब होने के बाद भी 18 वर्ष तक डायलिसिस पर रहना। भक्तों द्वारा किडनी दान की विनती करने के बाद भी स्वीकार न करना। ऐसे हैं संत प्रेमानंद जी महाराज.....!!


धन्य है भारत की धरती जहां समय-समय पर ऐसे संत पैदा होते रहे हैं।

भगवान और राधा रानी प्रेमानन्द जी को स्वस्थ रखें ताकि वो आगे भी निरन्तर समाज जागरण और सनातन की जड़ो को मजबूत करते रहें। ऐसे सन्तो की बहुत जरुरत है सनातन को इस वैचारिक आक्रमण काल में।

आज के वैचारिक दूषित आक्रमण काल में पूज्य प्रेमानन्द जी जैसे निर्मल निश्छल, निष्कपट, निस्वार्थ और सनातन की जड़ो को जड़ से सींचने वाले सन्तो को नितांत जरूरत है।

इस वैचारिक आक्रमण काल से सनातनियों को सकुशल जड़ों सहित बाहर निकालने में प्रेमानन्द जी जैसे पूज्य सन्तो की भूमिका महत्त्वपूर्ण है। 

भगवान और माता राधा रानी से पुनः प्रार्थना करते हैं ऐसे अपने निर्मल सन्त को स्वस्थ रखें ताकि सनातन की जड़ो को ये ओर मजबूत करते  रहें।


राधे राधे गोविंदा 🙏🚩

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